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ब्यावर के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री
श्री बिहारीलाल वर्मा
लेखकः वासुदेव मंगल
शिक्षा सेवा का एक पुनीत कार्य माना जाता है। परन्तु वर्तमान में इस कार्य को विशुद्ध व्यापार बना लिया गया है। इस देश में शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में जितनी लुट मची है उतनी सम्भवत् किसी ओर क्षेत्र में नहीं है। पढाई और ईलाज के नाम पर घर परिवार के लोगों को ईमोशनल ब्लेकमेल करने में न डाक्टर पिछे है न ही ये स्कूलें। बिमार होने पर परिजन बेचारे जिस तरह डाक्टर की कही हर बात को ब्रह्मवाक्य मानते हुए स्वीकारते जाते है और उनकी यही विवशता डाक्टरों को घर वालों की अण्टी ढीली कराने में सहायक साबित होती है वहीं सीमित परिवार के तहत एक दो बच्चों के अभिभावक बढती प्रतिस्पर्धा में अपने बच्चों के कोई कसर नहीं छोडना चाहते है। इसलिए उन्हें नये नये सब्जबाग दिखाकर व आकर्षक तामझाम के जरिये भारी भरकम फीस वसुलने में स्कुलें पीछे नहीं है। हर साल कुकरमुत्ते की तरह स्कुल खुल रहें है।
ब्यावर में 20वीं सदी के आरम्भ में राजनैतिक चेतना के साथ साथ शिक्षा क्षेत्र में भी नवजागरण आरम्भ हो चुका था। इसी क्रम में सन् 1905 में सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करने हेतु स्वामी प्रकाशानन्द जी ब्यावर पधारे। इस श्रंखला के अन्र्तगत सनातन धर्म संस्कृत पाठशाला सुनारों की गली बाकें बिहारी के मन्दिर में आरम्भ की गई। सन् 1909 में यह पाठशाला शाहपुरा मौहल्ले में राठी जी की हवेली के सामने बनाये गये नये परिसर में आरम्भ कर दी गई।
प्रसिद्ध शिक्षाशात्री श्री बिहारीलाल जी वर्मा श्री बंकिमलालजी इंजिनीयर (बी एण्ड आर) टाटगढ़ के पाॅंच लडकों में से दुसरे नम्बर के पुत्र थे।
आपने सन् 1913 ई. में बी ए एल एल बी की परीक्षा उत्तीर्ण की।
सनातन धर्म प्रकाशनी पाठशाला के श्री बिहारीलाल जी वर्मा सन् 1916 में हेडमास्टर नियुक्त हुए। उस समय पाठशाला कक्षा 6 तक थी। परन्तु सन 1916 में यह पाठशाला कक्षा 6 से 8 तक हो गई। इसका श्रेय श्री वर्मा जी को जाता है। उस समय राजपुताना की मिडिल परीक्षा हुआ करती थी। श्री वर्मा जी के अथक प्रयास से स्कूल को कक्षा 8 तक शिक्षा विभाग द्वारा सन् 1919 में मान्यता मिल गई।
सन् 1924 में श्री बिहारीलाल जी वर्मा ने अपने प्रयास से सनातन धर्म मिडिल स्कूल को इलाहाबाद शिक्षा बोर्ड से हाई स्कूल की मान्यता दिला दी।
सन् 1929 में सनातन धर्म प्रकाशनी हाई स्कूल को अजमेर शिक्षा बोर्ड से ईन्टरकाॅमर्स काॅलेज की मान्यता मिल गई। अतः वर्तमान भवन छोटा पडने लगा तब सन 1931 ई. में टाटगढ़ रोड पर काॅलेज का एक नया भवन बनाकर तैयार किया गया जहाॅ पर जुलाई सन् 1932 से कक्षा 9 से 12 तक की पढाई कराई जाने लगी। इस काॅलेज के प्रथम प्रिंसीपल श्री बिहारीलाल जी वर्मा ही बनाये गये। सन् 1954 में इसी काॅलेज को क्रमन्नोत कर डिग्री काॅलेज का रूप प्रदान किया गया। सन् 1956 में इस काॅलेज को क्रमन्नोत कर स्नातकोत्तर महाविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया।
राजपुताने का सनातन धर्म काॅलेज सबसे पहिला काॅमर्स काॅलेज सन् 1932 में आरम्भ हुआ जहाॅं पर राजपुताने की तमाम रियासतों से विद्यार्थी काॅमर्स पढ़ने के लिये ब्यावर आते थे। अतः उनके रहने के लिये एक गिब्सन हाॅस्टल का निर्माण कराया गया। अतः समस्त राजपुताने में सबसे पहिले इन्टरकाॅमर्स काॅलेज का दर्जा दिलाने वाले सन् 1931 में श्री बिहारीलालजी वर्मा ही थे। सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय सन् 1931 से लेकर आजतक राजस्थान में ही नहीं वरन् भारतवर्ष के सबसे अच्छे महाविद्यालयों में से एक है जो राजपुताने का सबसे पुराना महाविद्यालय है। श्री बिहारीलालजी वर्मा सेवानिवृति तक इस महाविद्यालय के प्रिंसीपल रहे। सनातन धर्म सभा के आप मृत्यु पर्यन्त तक सैक्रेट्री रहे। आप जैन गुरूकुल विद्या मन्दिर के क्रियाशील सलाहकार रहे। आप गुरूनानक बालिका मिडिल स्कूल सभा के भी क्रियाशील सलाहकार रहे।
1 जनवरी 1962 को आपकी अकस्मात ह्रदयगति रूक जाने से मृत्यु हो गई जबकि आप सनातन धर्म स्कूल के वार्षिक पारितोषित समापन समारोह सम्पन्न कराकर जाने ही वाले थे। आपके 3 पुत्रियाॅं और 2 पुत्र हैं आपके पुत्र श्री विनोदबिहारीलाल भटनागर तो ब्यावर में शिक्षा उप-निर्देशक के पद पर कार्य कर चुके है। आपका निवास स्थान शाहपुरा मौहल्ले में स्थित है। आज उनकी 56वीं पुण्य तिथि पर उनको शत् शत् नम्न।
आलेख: ब्यावर शहर के इतिहासविद् वासुदेव मंगल
ब्यावर (राज.) अजमेर
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